जब हुआ मतदान।
खूब बाँटा गया।
दारू और राशन-दान।
देश की जनता।
समझ वैठी।
यही है।
राजनीति का।
अमूल्य-दान।
लेकिन।
भईया जब वैठे।
गद्दी पर।
वही राशन-दान।
बन गया।
बिलकुल विषपान।
क्योंकि अब हुआ।
अपना-अपना।
राम-राम।
लेकिन।
इसका क्या हो।
समाधान।
इसलिए।
भारतीय राजनीतिक पार्टियों को।
अंकित चौरसिया का।
प्रणाम।🙏
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